Holi Ki Puja Vidhi || होली की पूजा विधि || Holika Puja Vidhi

       

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होली की पूजा विधि || Holi Ki Puja Vidhi || Holika Puja Vidhi

होली का नाम सुनते ही अपने मन व दिल में आनन्द व् उल्लास के गुब्बारे खिल जाते है ! क्योंकि यह पर्व ही कुछ ऐसा है ! होली का पर्व सारे देश में किसी ना किसी रूप में बनाया जाता है ! यह तो आप सब जानते हो की होली हर वर्ष की फाल्गुन मास में शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनायी जाती है ! तथा भद्रारहित समय में होली का दहन किया जाता हैं ! Online Specialist Astrologer Acharya Pandit Lalit Trivedi द्वारा बताये जा रहे होली की पूजा विधि || Holi Ki Puja Vidhi || Holika Puja Vidhi को पढ़कर आप भी होली की पूजा सही तरह से कर सकोंगे !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! जय श्री मेरे पूज्यनीय माता – पिता जी !! यदि आप अपनी कुंडली दिखा कर परामर्श लेना चाहते हो तो या किसी समस्या से निजात पाना चाहते हो तो कॉल करके या नीचे दिए लाइव चैट ( Live Chat ) से चैट करे साथ ही साथ यदि आप जन्मकुंडली, वर्षफल, या लाल किताब कुंडली भी बनवाने हेतु भी सम्पर्क करें Mobile & Whats app Number : 9667189678 Holi Ki Puja Vidhi By Online Specialist Astrologer Acharya Pandit Lalit Trivedi.

होली की पूजा विधि || Holi Ki Puja Vidhi || Holika Puja Vidhi

होलिका / होली पूजा मुहूर्त 2020 || Holika / Holi Ki Puja Muhurat 2020 

सुबह 08:14 से सुबह 09:41 तक 

सुबह 11:09 से दोपहर 12:35 तक 

दोपहर 03:31 से सूर्यास्त तक। 

ऊपर  दिए गए समय पर आप Holi Ki Puja कर सकते हैं। 

होलिका / होली पूजा सामग्री || Holika / Holi Ki Puja Samagri

गोबर से बने बड़कूले, रोली, मौली, अक्षत, धुपबत्ती, फूलमाला,  कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी, मूंग-चावल,  फूले, बताशे, गुलाल, नारियल, जल का लोटा, गेहूं की नई हरी बालियां, हरे चने का पौधा आदि ।

बड़कूले कितने होने चाहिए || Badakule Kitane Hone Chahiye

Holi Ki Puja से दस बारह दिन पहले शुभ दिन देखकर गोबर से सात बड़कूले बनाये जाते है। गोबर से बने बड़कूले को भरभोलिए भी कहा जाता है। पाँच बड़कूले छेद वाले बनाये जाते है ताकि उनको माला बनाने के लिए पिरोया जा सके । 

 

दो बड़कूले बिना छेद वाले बनाये जाते है । इसके बाद गोबर से ही सूरज, चाँद, तारे, और अन्य खिलौने बनाये जाते है। पान, पाटा, चकला, एक जीभ, होला–होली बनाये जाते है। इन पर आटे, हल्दी, मेहंदी, गुलाल आदि से बिंदियां लगाकर सजाया जाता है। होलिका की आँखें चिरमी या कोड़ी से बनाई जाती है। अंत में ढाल और तलवार बनाये जाते है । 

बड़कूले से माला बनाई जाती है। माला में होलिका, खिलोंने, तलवार, ढाल आदि भी पिरोये जाते है। एक माला पितरों की, एक हनुमान जी की, एक शीतला  माता की और एक घर के लिए बनाई जाती है। बाजार से तैयार माला भी खरीद सकते है। यह Holi Ki Puja में काम आती है ।

होलिका / होली पूजा की विधि || Holika / Holi Ki Puja Vidhi

Holi Ki Puja करते समय आपका मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ होना चाहिए । जल की बूंदों का छिड़काव आसपास तथा पूजा की थाली और खुद पर करें । इसके पश्चात नरसिंह भगवान का स्मरण करते हुए उन्हें रोली, मौली, अक्षत, पुष्प अर्पित करें । 

 

इसी प्रकार भक्त प्रह्लाद को स्मरण करते हुए उन्हें रोली, मौली, अक्षत, पुष्प  अर्पित करें। इसके पश्चात् होलिका को रोली, मौली, चावल अर्पित करें, पुष्प अर्पित करें , चावल मूंग का भोग लगाएं ।  बताशा, फूले आदि चढ़ाएं । हल्दी  मेहंदी, गुलाल, नारियल और बड़कूले चढ़ाएं । हाथ जोड़कर होलिका से सुख समृद्धि की कामना करें।

सूत के धागे से होलिका के चारों ओर घूमते हुए तीन, पाँच या सात बार लपेट दें । जल का लोटा वहीं पूरा खाली कर दें। इसके बाद होली का दहन किया जाता है । पुरुषों के माथे पर तिलक लगाया जाता है। होली जलने पर रोली चावल चढ़ाकर सात बार अर्घ्य देकर सात परिक्रमा करनी चाहिए ।  इसके बाद साथ लाये गए हरे गेहूं और चने होली की अग्नि में भून लें। होली की अग्नि थोड़ी सी अपने साथ घर ले आएं। ये दोनों काम बड़ी सावधानी पूर्वक करने चाहिए। होली की अग्नि से अपने घर में धूप दिखाएँ। भूने हुए गेहूं और चने प्रसाद के रूप में ग्रहण करे ।

होलिका / होली पूजा मंत्र || Holika / Holi Ki Puja Mantra

होलिका पूजन के समय निम्न मंत्र का उच्चारण करना चाहि‌ए : 

अहकूटा भयत्रस्तैः कृता त्वं होलि बालिशैः ।

अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम्‌ ॥

 

होलिका दहन के पश्चात उसकी जो राख निकलती है,

जिसे होली – भस्म कहा जाता है, उसे शरीर पर लगाना चाहि‌ए।

होली की राख लगाते समय निम्न मंत्र का उच्चारण करना चाहि‌ए :

वंदितासि सुरेन्द्रेण ब्रम्हणा शंकरेण च । अतस्त्वं पाहि माँ देवी ! भूति भूतिप्रदा भव ॥

ऐसा माना जाता है कि होली की जली हु‌ई राख घर में समृद्धि लाती है । साथ ही ऐसा करने से घर में शांति और प्रेम का वातावरण निर्मित होता है।

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