श्री सत्यनारायण व्रत पूजा विधि ( Shri Satyanarayan Vrat Puja Vidhi ) Shri Satyanarayan Puja Vidhi

श्री सत्यनारायण व्रत पूजा विधि [ Shri Satyanarayan Vrat Puja Vidhi & Shri Satyanarayan Puja Vidhi ]

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श्री सत्यनारायण व्रत पूजा विधि : shri satyanarayan vrat puja vidhi in hindi ( बड़ी पूजा विधि )

श्री सत्यनारायण पूजा कब करें : shri satyanarayan puja kab kare in hindi 

श्री सत्यनारायण का पूजन महीने में एक बार पूर्णिमा या संक्रांति को या किसी भी दिन या समयानुसार किया जा सकता है। 

श्री सत्यनारायण पूजा सामग्री : shri satyanarayan puja samagri in hindi

भगवन श्री सत्यनारायण की मूर्ति या फ़ोटो, 1 चौकी या पटला तथा उस पर बिछाने के लिए एक मीटर पीला या सफ़ेद कपडा, अबीर, गुलाल, कुमकुम (रोली), सिंदूर, हल्दी, मोली, धुपबत्ती, 10 ग्राम लौंग, 10 ग्राम इलायची, 32 सुपारी, चन्दन, 500 ग्राम चावल, 250 गेहूँ, 50 ग्राम कपूर, इत्र, कापूस, गंगाजल, गुलाबजल, गोमूत्र, पञ्च मेवा, 5 जनेऊ, 1 नारियल, भगवन के वस्त्र, 250 ग्राम घी, 10 ग्राम पीली राई, 5 पान के पत्ते, 5 आम के पत्ते, हार फूल तुलसी पत्र, 4 केले के खम्बे, 250 ग्राम मिठाई, 1 लीटर दूध, 250 ग्राम दही, 100 ग्राम चीनी, 50 ग्राम शहद, भगवन के भोग के लिये चूरमा, पंजीरी या हलुआ इत्यादि. 

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श्री सत्यनारायण हवन सामग्री : shri satyanarayan havan samagri in hindi ( यदि हवन करना हो तो ) : 

हवन सामग्री, तिल, चावल, जौ, चीनी, घी, नव ग्रह समिधा 2 बण्डल, 1 किलो आम की लकड़ी.

श्री सत्यनारायण पूजन विधि : shri satyanarayan pujan vidhi in hindi 

श्री सत्यनारायण का पूजन जीवन में सत्य के महत्तव को बतलाता है। इस दिन स्नान करके कोरे अथवा धुले हुए शुद्ध वस्त्र पहनें। माथे पर तिलक लगाएं। अब भगवान गणेश का नाम लेकर पूजन शुरु करें। 

पूजन का मंडप तैयार करना : पूर्वाभिमुख हो कर एक चोकी पर पीला कपडा बिछा कर केले के खम्बे को लगा दे उस के बाद चित्रानुसार भगवन श्री सत्यनाराण गणेश नवग्रह कलश षोडश मातृकाएँ वास्तुदेवता की स्थापना करें अष्टदल या स्वस्तिक बनाएं। बीच में चावल रखें। पान सुपारी से भगवान गणेश की स्थापना करें। अब भगवान सत्यनारायण की तस्वीर रखें। श्री कृष्ण या नारायण की प्रतिमा की भी स्थापना करें।

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सत्यनारायण के दाहिनी ओर शंख की स्थापना करें। जल से भरा एक कलश भी दाहिनी ओर रखें। कलश पर शक्कर या चावल से भरी कटोरी रखें। कटोरी पर नारियल भी रखा जा सकता है। अब बायी ओर दीपक रखें। केले के पत्तों से पाटे के दोनो ओर सजावट करें। 

अब पाटे के आगे एक सफेद कपड़ा बिछाकर उस पर नौ जगह चावल की ढेरी रखें तथा नवग्रह मंडल बनाएं पूजन के समय इनमें नवग्रहों का पूजन किया जाना है। और उस के साथ ही गेहूँ की सोलह ढेरी रखें तथा षोडशमातृका मंडल तैयार करने के बाद पूजन शुरु करें।

प्रसाद के लिए पंचामृत, गेहूं के आटे को सेंककर तैयार की गई पंजीरी या शक्कर का बूरा, फल, नारियल इन सबको सवाया मात्रा में इकठ्ठा कर लें। या जितना शक्ति हो उस अनुसार इकठ्ठा कर लें। भगवान की तस्वीर के आगे ये सभी पदार्थ रख दें। 

श्री सत्यनारायण पूजा सकंल्प विधि : 

संकल्प करने से पहले हाथों मेे जल, फूल व चावल लें। सकंल्प में जिस दिन पूजन कर रहे हैं उस वर्ष, उस वार, तिथि उस जगह और अपने नाम को लेकर अपनी इच्छा बोले। अब हाथों में लिए गए जल को जमीन पर छोड़ दें।

संकल्प का उदाहरण – जैसे 8/5/2018 को श्री सत्यनारायण का पूजन किया जाना है। तो इस प्रकार संकल्प लें। मैं…………..विक्रम संवत् 2075 को, वैशाख मास के पूर्णिमा तिथि को सोमवार के दिन, अमुक नक्षत्र में, भारत देश के अमुक राज्य के अमुक शहर में, महाकाल तीर्थ में, इस मनोकामना से ……………..श्री सत्यनारायण का पूजन कर रही / रहा हूं।

पवित्रकरण मंत्र : 

बाएँ हाथ में जल लेकर दाहिने हाथ की अनामिका से निम्न मंत्र बोलते हुए अपने ऊपर एवं पूजन सामग्री पर जल छिड़कें-

अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा ।

यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यंतरः शुचिः।।

पुनः पुण्डरीकाक्षं, पुनः पुण्डरीकाक्षं, पुनः पुण्डरीकाक्षं ।

आसन मंत्र :

निम्न मंत्र से अपने आसन पर उपरोक्त तरह से जल छिड़कें-

पृथ्वी त्वया घता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता ।

त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु च आसनम्।

ग्रंथि बंधन मंत्र :

यदि यजमान सपत्नीक बैठ रहे हों तो निम्न मंत्र के पाठ से ग्रंथि बंधन या गठजोड़ा करें-

यदाबध्नन दाक्षायणा हिरण्य(गुं)शतानीकाय सुमनस्यमानाः ।

तन्म आ बन्धामि शत शारदायायुष्यंजरदष्टियर्थासम्।

आचमन मंत्र :

इसके बाद दाहिने हाथ में जल लेकर तीन बार आचमन करें व तीन बार कहें-

ऊँ केशवाय नमः 

ऊँ नारायणाय नमः 

ऊँ माधवाय नमः

यह मंत्र बोलकर हाथ धोएं

ऊँ गोविन्दाय नमः हस्तं प्रक्षालयामि ।

स्वस्तिवाचन मंत्र :

सबसे पहले स्वस्तिवाचन किया जाना चाहिए। 

स्वस्ति न इंद्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः ।

स्वस्ति नस्ताक्र्षयो अरिष्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु।

द्यौः शांतिः अंतरिक्षगुं शांतिः पृथिवी शांतिरापः

शांतिरोषधयः शांतिः। वनस्पतयः शांतिर्विश्वे देवाः

शांतिर्ब्रह्म शांतिः सर्वगुं शांतिः शांतिरेव शांति सा

मा शांतिरेधि। यतो यतः समिहसे ततो नो अभयं कुरु ।

शंन्नः कुरु प्राजाभ्यो अभयं नः पशुभ्यः। सुशांतिर्भवतु।

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अब सभी देवी-देवताओं को प्रणाम करें :

श्रीमन्महागणाधिपतये नमः ।

लक्ष्मीनारायणाभ्यां नमः ।

उमा महेश्वराभ्यां नमः ।

वाणी हिरण्यगर्भाभ्यां नमः ।

शचीपुरन्दराभ्यां नमः ।

मातृ-पितृचरणकमलेभ्यो नमः ।

इष्टदेवताभ्यो नमः ।

कुलदेवताभ्यो नमः ।

ग्रामदेवताभ्यो नमः ।

वास्तुदेवताभ्यो नमः ।

स्थानदेवताभ्यो नमः ।

सर्वेभ्योदेवेभ्यो नमः ।

सर्वेभ्यो ब्राह्मणोभ्यो नमः।

सिद्धि बुद्धि सहिताय श्री मन्यहा गणाधिपतये नमः।

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भगवान गणेश को स्नान कराएं। वस्त्र अर्पित करें। जनेऊ अर्पित करें। गंध, पुष्प, अक्षत अर्पित करें। भगवान नारायण को स्नान कराएं। जनेऊ अर्पित करें। गधं, पुष्प,अक्षत अर्पित करें। अब दीपक प्रज्वलित करें। धूप, दीप करें। भगवान गणेश और सत्यनारायण धूप-दीप अर्पित करें। ‘‘ऊँ सत्यनारायण नमः’’ कहते हुए सत्यनारायण का पूजन करें। अब चावल की ढेरी में नवग्रहों का पूजन करें। अष्टगंध, पुष्प को नवग्रहों को अर्पित करें।

नवग्रहों का पूजन का मंत्र: 

ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च गुरुश्च शुक्रः शनि राहुकेतवः सर्वेग्रहाः शांतिकरा भवन्तु। 

इस मंत्र से नवग्रहों का पूजन करें। अब कलश में वरुण देव का पूजन करें। दीपक में अग्नि देव का पूजन करें।

कलश पूजन विधि व् मन्त्र : 

कलशस्य मुखे विष्णु कंठे रुद्र समाश्रिताः मूलेतस्य स्थितो ब्रह्मा मध्ये मात्र गणा स्मृताः। कुक्षौतु सागरा सर्वे सप्तद्विपा वसुंधरा, ऋग्वेदो यजुर्वेदो सामगानां अथर्वणाः अङेश्च सहितासर्वे कलशन्तु समाश्रिताः।

ऊँ अपां पतये वरुणाय नमः। इस मंत्र के साथ कलश में वरुण देवता का पूजन करें।

दीपक जलाने का मंत्र : 

दीपक प्रज्वलित करें एवं हाथ धोकर दीपक का पुष्प एवं कुंकु से पूजन करें-

भो दीप देवरुपस्त्वं कर्मसाक्षी ह्यविन्घकृत ।

यावत्कर्मसमाप्तिः स्यात तावत्वं सुस्थिर भवः।

यह सब पूजा करने के बाद श्री सत्यनारायण व्रत कथा का पाठ करें अथवा सुनें । कथा पूरी होने पर भगवान श्री सत्यनारायण जी की आरती करें। प्रदक्षिणा करें। अब नेवैद्य अर्पित करें। फल, मिठाई, शक्कर का बूरा जो भी पदार्थ सवाया इकठ्ठा करा हो। उन सभी पदार्थों का भगवान को भोग अर्पित करें । भगवान का प्रसाद सभी भक्तों को बांटे ।

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