श्री संतोषी चालीसा || Shri Santoshi Chalisa || Maa Santoshi Chalisa

       

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श्री संतोषी चालीसा || Shri Santoshi Chalisa || Maa Santoshi Chalisa

श्री संतोषी चालीसा माँ संतोषी माता को समर्पित हैं ! श्री संतोषी चालीसा पढ़ने से जातक को परिवार में सुख-शान्ति की प्राप्ति होती हैं ! और सभी मनोंकामनाओं की पूर्ति कर शोक विपत्ति चिन्ता परेशानियों को दूर कर देती हैं ! श्री संतोषी चालीसा आदि के बारे में बताने जा रहे हैं !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! यदि आप अपनी कुंडली दिखा कर परामर्श लेना चाहते हो तो या किसी समस्या से निजात पाना चाहते हो तो कॉल करके या नीचे दिए लाइव चैट ( Live Chat ) से चैट करे साथ ही साथ यदि आप जन्मकुंडली, वर्षफल, या लाल किताब कुंडली भी बनवाने हेतु भी सम्पर्क करें : 9667189678  Shri Santoshi Chalisa By Online Specialist Astrologer Acharya Pandit Lalit Trivedi.

श्री संतोषी चालीसा || Shri Santoshi Chalisa || Maa Santoshi Chalisa

चौपाई 

जै युग युग की आदि शक्ति । जग में प्रचलित है तव भक्ति ||1

आदि मध्य और अवसाना । तेरी गति विधि कोई न जाना ||2

निर्मल श्रद्धा में होती । थोड़े में संतुष्ट हो जाती ||3

कलि में नाम धार्यो सन्तोषी । अग्नि तुल्य प्रत्यक्ष विशेखी ||4

कला ज्ञान बल विद्या दात्री । तुम सम सरल सुखद नहिं धात्री ||5

सकल चराचर तुम से चलते । भूत प्रेत यमदूत सिंहरते ||6

दुष्ट दलन संहार कारिणी । माता तुम ब्रह्माण्ड धारिणी ||7

सरस्वती लक्ष्मी और काली । अमित शक्ति की खान निराली ||8

तुम्हारे शरण गहे कोई । मनोकामना पूरन होई ||9

तुम गणेश की माँ कन्या । तुमसे धरती हो गई धन्या ||10

ऋद्धि सिद्धि है तुम्हारी माता । मंगलमय वरदान के दाता ||11

ब्रह्मा विष्णु महेश त्रिमाया । उसका बल तुझमें है समाया ||12

सिर पर कंचन मुकुट सुहाता । सुन्दर रत्नसमूह दिखाता ||13

मधुर मनोहर मुखड़ा कोमल । पुष्पमाला और श्यामल कुन्तल ||14

अलंकार सोहित हैं अंग में । नव्य दिव्य तन गेरु रंग में ||15

सुन्दर वस्त्र में माला रखती । दर्शक के मन वश में करती ||16

पदम् त्रिरेख धरे दो हाथ । चतुर्भुजी को टेकहु माथ ||17

सन्मुख अमृत भरी सुराहि । साथ कामधेनु मनचाही ||18

स्वर्ण कलश रहता है आगे । भक्त्तों के सौभाग हैं जागे ||19

तुम्हारे भक्त्तिभाव जो पावे । अजर अमर जग में हो जावे ||20

नमो नमो जग तारन हारी । दु:ख दरिद्र तारो महतारी ||21

शुक्रवार दिन अति अनुकूला । सन्तोषी व्रत मंगल मूला ||22

बहुविध मात की पूजा कर । सन्तोषी की कथा श्रवण कर ||23

गुड़ और चना प्रसाद चढ़ावे । निराहार एक जून मनावे ||24

सावधान उस दिन यह राखे । भूल से खट्टा देवे न चाखे ||25

नहिं तो मातु कुपित हो जाती । वंश सहित संतान नसाती ||26

शुक्रवार सोलह व्रत राखे । उद्यापन उत्साह मनावे ||27

फिर तो इच्छा पूरन होई । मातु कृपा से देर न होई ||28

अद्भुत देवी चमत्कारिणी । पत्न में चिन्ता पीड़ा हरणी ||29

जापर कृपा मातु की होई । जीत सके न उसको कोई ||30

धन विवेक सुख शान्ति प्रदायिनी । इस युग की नवप्राण विधायिनी ||31

तुम सम देवी कोऊ नाहीं । देख लिया मैं त्रिभुवन माहीं ||32

दुख अति पाई बहु बेचारी । पति वियोग की वह दुखियारी ||33

नारियल खोपर पीकर पानी । भूस की रोटी खाई अभागिनी ||34

संतोषी का व्रत जो कीन्हा । पति सहित वैभव पा लीन्हा ||35

पीड़ा चिन्ता काटहु माता । अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता ||36

संतोषी उपवास करे जो । सुख सम्पति का भोग करे वो  ||37

यहाँ वहाँ सब ठौर समाई । तुम्हरी महिमा कही न जाई ||38

मनवांछित वर पावै क्वारी । पाये सुहाग सधवा सन्नारी  ||39

सुख धन जन सब मनोकामना । पूर्ण होगी सत्य जानना ||40

पाठ सवा सौ करै जो कोई । मिटै कष्ट सुख सम्पति होई ||41

दोहा

सन्तोषी संकट हरन, हे चमत्कार की मूर्ति ।

ग्रह बाधा को दूर कर, करो कामना पूर्ति ।।

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