श्री सन्तानगोपाल स्तोत्र || Shri Santan Gopal Stotra || Santan Gopal Stotram

       

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श्री सन्तानगोपाल स्तोत्र || Shri Santan Gopal Stotra || Santan Gopal Stotram

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श्री सन्तानगोपाल स्तोत्र || Shri Santan Gopal Stotra || Santan Gopal Stotram

श्रीशं कमलपत्राक्षं देवकीनन्दनं हरिम् ।

सुतसंप्राप्तये कृष्णं नमामि मधुसूदनम् ॥१॥

नमाम्यहं वासुदेवं सुतसंप्राप्तये हरिम् ।

यशोदाङ्कगतं बालं गोपालं नन्दनन्दनम् ॥२॥

अस्माकं पुत्रलाभाय गोविन्दं मुनिवन्दितम् ।

नमाम्यहं वासुदेवं देवकीनन्दनं सदा ॥३॥

गोपालं डिम्भकं वन्दे कमलापतिमच्युतम् ।

पुत्रसंप्राप्तये कृष्णं नमामि यदुपुङ्गवम् ॥४॥

पुत्रकामेष्टिफलदं कञ्जाक्षं कमलापतिम् ।

देवकीनन्दनं वन्दे सुतसम्प्राप्तये मम ॥५॥

पद्मापते पद्मनेत्रे पद्मनाभ जनार्दन ।

देहि मे तनयं श्रीश वासुदेव जगत्पते ॥६॥

यशोदाङ्कगतं बालं गोविन्दं मुनिवन्दितम् ।

अस्माकं पुत्र लाभाय नमामि श्रीशमच्युतम् ॥७॥

श्रीपते देवदेवेश दीनार्तिर्हरणाच्युत ।

गोविन्द मे सुतं देहि नमामि त्वां जनार्दन ॥८॥

भक्तकामद गोविन्द भक्तं रक्ष शुभप्रद ।

देहि मे तनयं कृष्ण रुक्मिणीवल्लभ प्रभो ॥९॥

रुक्मिणीनाथ सर्वेश देहि मे तनयं सदा ।

भक्तमन्दार पद्माक्ष त्वामहं शरणं गतः ॥१०॥

देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते ।

देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥११॥

वासुदेव जगद्वन्द्य श्रीपते पुरुषोत्तम ।

देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥१२॥

कञ्जाक्ष कमलानाथ परकारुणिकोत्तम ।

देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥१३॥

लक्ष्मीपते पद्मनाभ मुकुन्द मुनिवन्दित ।

देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥१४॥

कार्यकारणरूपाय वासुदेवाय ते सदा ।

नमामि पुत्रलाभार्थ सुखदाय बुधाय ते ॥१५॥

राजीवनेत्र श्रीराम रावणारे हरे कवे ।

तुभ्यं नमामि देवेश तनयं देहि मे हरे ॥१६॥

अस्माकं पुत्रलाभाय भजामि त्वां जगत्पते ।

देहि मे तनयं कृष्ण वासुदेव रमापते ॥१७॥

श्रीमानिनीमानचोर गोपीवस्त्रापहारक ।

देहि मे तनयं कृष्ण वासुदेव जगत्पते  ॥१८॥

अस्माकं पुत्रसंप्राप्तिं कुरुष्व यदुनन्दन ।

रमापते वासुदेव मुकुन्द मुनिवन्दित ॥१९॥

वासुदेव सुतं देहि तनयं देहि माधव ।

पुत्रं मे देहि श्रीकृष्ण वत्सं देहि महाप्रभो॥२०॥

डिम्भकं देहि श्रीकृष्ण आत्मजं देहि राघव ।

भक्तमन्दार मे देहि तनयं नन्दनन्दन ॥२१॥

नन्दनं देहि मे कृष्ण वासुदेव जगत्पते ।

कमलनाथ गोविन्द मुकुन्द मुनिवन्दित ॥२२॥

अन्यथा शरणं नास्ति त्वमेव शरणं मम ।

सुतं देहि श्रियं देहि श्रियं पुत्रं प्रदेहि मे ॥२३॥

यशोदास्तन्यपानज्ञं पिबन्तं यदुनन्दनं ।

वन्देऽहं पुत्रलाभार्थं कपिलाक्षं हरिं सदा ॥२४॥

नन्दनन्दन देवेश नन्दनं देहि मे प्रभो ।

रमापते वासुदेव श्रियं पुत्रं जगत्पते ॥२५॥

पुत्रं श्रियं श्रियं पुत्रं पुत्रं मे देहि माधव ।

अस्माकं दीनवाक्यस्य अवधारय श्रीपते ॥२६॥

गोपाल डिम्भ गोविन्द वासुदेव रमापते ।

अस्माकं डिम्भकं देहि श्रियं देहि जगत्पते ॥२७॥

मद्वाञ्छितफलं देहि देवकीनन्दनाच्युत ।

मम पुत्रार्थितं धन्यं कुरुष्व यदुनन्दन ॥२८॥

याचेऽहं त्वां श्रियं पुत्रं देहि मे पुत्रसंपदम्।

भक्तचिन्तामणे राम कल्पवृक्ष महाप्रभो ॥२९॥

आत्मजं नन्दनं पुत्रं कुमारं डिम्भकं सुतम् ।

अर्भकं तनयं देहि सदा मे रघुनन्दन ॥३०॥

वन्दे सन्तानगोपालं माधवं भक्तकामदम् ।

अस्माकं पुत्रसंप्राप्त्यै सदा गोविन्दमच्युतम् ॥३१॥

ॐकारयुक्तं गोपालं श्रीयुक्तं यदुनन्दनम् ।

क्लींयुक्तं देवकीपुत्रं नमामि यदुनायकम् ॥३२॥

वासुदेव मुकुन्देश गोविन्द माधवाच्युत ।

देहि मे तनयं कृष्ण रमानाथ महाप्रभो ॥३३॥

राजीवनेत्र गोविन्द कपिलाक्ष हरे प्रभो ।

समस्तकाम्यवरद देहि मे तनयं सदा ॥३४॥

अब्जपद्मनिभं पद्मवृन्दरूप जगत्पते ।

देहि मे वरसत्पुत्रं रमानायक माधव ॥३५॥

नन्दपाल धरापाल गोविन्द यदुनन्दन ।

देहि मे तनयं कृष्ण रुक्मिणीवल्लभ प्रभो ॥३६॥

दासमन्दार गोविन्द मुकुन्द माधवाच्युत ।

गोपाल पुण्डरीकाक्ष देहि मे तनयं श्रियम् ॥३७॥

यदुनायक पद्मेश नन्दगोपवधूसुत ।

देहि मे तनयं कृष्ण श्रीधर प्राणनायक ॥३८॥

अस्माकं वाञ्छितं देहि देहि पुत्रं रमापते ।

भगवन् कृष्ण सर्वेश वासुदेव जगत्पते ॥३९॥

रमाहृदयसंभारसत्यभामामनः प्रिय ।

देहि मे तनयं कृष्ण रुक्मिणीवल्लभ प्रभो ॥४०॥

चन्द्रसूर्याक्ष गोविन्द पुण्डरीकाक्ष माधव ।

अस्माकं भाग्यसत्पुत्रं देहि देव जगत्पते ॥४१॥

कारुण्यरूप पद्माक्ष पद्मनाभसमर्चित ।

देहि मे तनयं कृष्ण देवकीनन्दनन्दन ॥४२॥

देवकीसुत श्रीनाथ वासुदेव जगत्पते ।

समस्तकामफलद देहि मे तनयं सदा ॥४३॥

भक्तमन्दार गम्भीर शङ्कराच्युत माधव ।

देहि मे तनयं गोपबालवत्सल श्रीपते ॥४४॥

श्रीपते वासुदेवेश देवकीप्रियनन्दन ।

भक्तमन्दार मे देहि तनयं जगतां प्रभो॥४५॥

जगन्नाथ रमानाथ भूमिनाथ दयानिधे ।

वासुदेवेश सर्वेश देहि मे तनयं प्रभो ॥४६॥

श्रीनाथ कमलपत्राक्ष वासुदेव जगत्पते ।

देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥४७॥

दासमन्दार गोविन्द भक्तचिन्तामणे प्रभो ।

देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥४८॥

गोविन्द पुण्डरीकाक्ष रमानाथ महाप्रभो ।

देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥४९॥

श्रीनाथ कमलपत्राक्ष गोविन्द मधुसूदन ।

मत्पुत्रफलसिद्ध्यर्थं भजामि त्वां जनार्दन ॥५०॥

स्तन्यं पिबन्तं जननीमुखांबुजं विलोक्य मन्दस्मितमुज्ज्वलाङ्गम् ।

स्पृशन्तमन्यस्तनमङ्गुलीभिर्वन्दे यशोदाङ्कगतं मुकुन्दम् ॥५१॥

याचेऽहं पुत्रसन्तानं भवन्तं पद्मलोचन ।

देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥५२॥

अस्माकं पुत्रसम्पत्तेश्चिन्तयामि जगत्पते ।

शीघ्रं मे देहि दातव्यं भवता मुनिवन्दित ॥५३॥

वासुदेव जगन्नाथ श्रीपते पुरुषोत्तम ।

कुरु मां पुत्रदत्तं च कृष्ण देवेन्द्रपूजित ॥५४॥

कुरु मां पुत्रदत्तं च यशोदाप्रियनन्दनम् ।

मह्यं च पुत्रसन्तानं दातव्यंभवता हरे ॥५५॥

वासुदेव जगन्नाथ गोविन्द देवकीसुत ।

देहि मे तनयं राम कौशल्याप्रियनन्दन ॥५६॥

पद्मपत्राक्ष गोविन्द विष्णो वामन माधव ।

देहि मे तनयं सीताप्राणनायक राघव ॥५७॥

कञ्जाक्ष कृष्ण देवेन्द्रमण्डित मुनिवन्दित ।

लक्ष्मणाग्रज श्रीराम देहि मे तनयं सदा ॥५८॥

देहि मे तनयं राम दशरथप्रियनन्दन ।

सीतानायक कञ्जाक्ष मुचुकुन्दवरप्रद ॥५९॥

विभीषणस्य या लङ्का प्रदत्ता भवता पुरा ।

अस्माकं तत्प्रकारेण तनयं देहि माधव ॥६०॥

भवदीयपदांभोजे चिन्तयामि निरन्तरम् ।

देहि मे तनयं सीताप्राणवल्लभ राघव ॥६१॥

राम मत्काम्यवरद पुत्रोत्पत्तिफलप्रद ।

देहि मे तनयं श्रीश कमलासनवन्दित ॥६२॥

राम राघव सीतेश लक्ष्मणानुज देहि मे ।

भाग्यवत्पुत्रसन्तानं दशरथप्रियनन्दन ।

देहि मे तनयं राम कृष्ण गोपाल माधव ॥६४॥

कृष्ण माधव गोविन्द वामनाच्युत शङ्कर ।

देहि मे तनयं श्रीश गोपबालकनायक ॥६५॥

गोपबाल महाधन्य गोविन्दाच्युत माधव ।

देहि मे तनयं कृष्ण वासुदेव जगत्पते ॥६६॥

दिशतु दिशतु पुत्रं देवकीनन्दनोऽयं दिशतु दिशतु शीघ्रं भाग्यवत्पुत्रलाभम् ।

दिशतु दिशतु शीघ्रं श्रीशो राघवो रामचन्द्रो शतु पुत्रं वंश विस्तारहेतोः ॥६७॥

दीयतां वासुदेवेन तनयोमत्प्रियः सुतः ।

कुमारो नन्दनः सीतानायकेन सदा मम ॥६८॥

राम राघव गोविन्द देवकीसुत माधव ।

देहि मे तनयं श्रीश गोपबालकनायक ॥६९॥वंशविस्तारकं

पुत्रं देहि मे मधुसूदन ।

सुतं देहि सुतं देहि त्वामहं शरणं गतः ॥७०॥

ममाभीष्टसुतं देहि कंसारे माधवाच्युत ।

सुतं देहि सुतं देहि त्वामहं शरणं गतः॥७१॥

चन्द्रार्ककल्पपर्यन्तं तनयं देहि माधव ।

सुतं देहि सुतं देहि त्वामहं शरणं गतः॥७२॥

विद्यावन्तं बुद्धिमन्तं श्रीमन्तं तनयं सदा ।

देहि मे तनयं कृष्ण देवकीनन्दन प्रभो ॥७३॥

नमामि त्वां पद्मनेत्र सुतलाभाय कामदम् ।

मुकुन्दं पुण्डरीकाक्षं गोविन्दं मधुसूदनम् ॥७४॥

भगवन् कृष्ण गोविन्द सर्वकामफलप्रद ।

देहि मे तनयं स्वामिंस्त्वामहं शरणं गतः ॥७५॥

स्वामिंस्त्वं भगवन् राम कृष्न माधव कामद ।

देहि मे तनयं नित्यं त्वामहं शरणं गतः ॥७६॥

तनयं देहिओ गोविन्द कञ्जाक्ष कमलापते ।

सुतं देहि सुतं देहि त्वामहं शरणं गतः॥७७॥

पद्मापते पद्मनेत्र प्रद्युम्न जनक प्रभो ।

सुतं देहि सुतं देहि त्वामहं शरणं गतः ॥७८॥

शङ्खचक्रगदाखड्गशार्ङ्गपाणे रमापते ।

देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥७९॥

नारायण रमानाथ राजीवपत्रलोचन ।

सुतं मे देहि देवेश पद्मपद्मानुवन्दित ॥८०॥

राम राघव गोविन्द देवकीवरनन्दन ।

रुक्मिणीनाथ सर्वेश नारदादिसुरार्चित ॥८१॥

देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते ।

देहि मे तनयं श्रीश गोपबालकनायक ॥८२॥

मुनिवन्दित गोविन्द रुक्मिणीवल्लभ प्रभो ।

देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥८३॥

गोपिकार्जितपङ्केजमरन्दासक्तमानस ।

देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥८४॥

रमाहृदयपङ्केजलोल माधव कामद ।

ममाभीष्टसुतं देहि त्वामहं शरणं गतः ॥८५॥

वासुदेव रमानाथ दासानां मङ्गलप्रद ।

देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥८६॥

कल्याणप्रद गोविन्द मुरारे मुनिवन्दित ।

देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥८७॥

पुत्रप्रद मुकुन्देश रुक्मिणीवल्लभ प्रभो ।

देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥८८॥

पुण्डरीकाक्ष गोविन्द वासुदेव जगत्पते ।

देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥८९॥

दयानिधे वासुदेव मुकुन्द मुनिवन्दित ।

देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥९०॥

पुत्रसम्पत्प्रदातारं गोविन्दं देवपूजितम् ।

वन्दामहे सदा कृष्णं पुत्र लाभ प्रदायिनम् ॥९१॥

कारुण्यनिधये गोपीवल्लभाय मुरारये ।

नमस्ते पुत्रलाभाय देहि मे तनयं विभो ॥९२॥

नमस्तस्मै रमेशाय रुमिणीवल्लभाय ते ।

देहि मे तनयं श्रीश गोपबालकनायक ॥९३॥

नमस्ते वासुदेवाय नित्यश्रीकामुकाय च ।

पुत्रदाय च सर्पेन्द्रशायिने रङ्गशायिने ॥९४॥

रङ्गशायिन् रमानाथ मङ्गलप्रद माधव ।

देहि मे तनयं श्रीश गोपबालकनायक ॥९५॥

दासस्य मे सुतं देहि दीनमन्दार राघव ।

सुतं देहि सुतं देहि पुत्रं देहि रमापते ॥९६॥

यशोदातनयाभीष्टपुत्रदानरतः सदा ।

देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः॥९७॥

मदिष्टदेव गोविन्द वासुदेव जनार्दन ।

देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥९८॥

नीतिमान् धनवान् पुत्रो विद्यावांश्च प्रजापते ।

भगवंस्त्वत्कृपायाश्च वासुदेवेन्द्रपूजित ॥९९॥

यःपठेत् पुत्रशतकं सोऽपि सत्पुत्रवान् भवेत ।

श्रीवासुदेवकथितं स्तोत्ररत्नं सुखाय च ॥१००॥

जपकाले पठेन्नित्यं पुत्रलाभं धनं श्रियम् ।

ऐश्वर्यं राजसम्मानं सद्यो याति न संशयः ॥१०१॥

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