महाविद्या मातंगी साधना विधि ( Mahavidya Matangi Sadhana Vidhi ) Matangi Sadhana Kaise Kare

       

महाविद्या मातंगी साधना विधि [ Mahavidya Matangi Sadhana Vidhi & Matangi Sadhana Kaise Kare ]

आज हम आपको मातंगी साधना विधि के बारे में बताने जा रहे हैं ! यह तो आप सब जानते है की दस महाविद्याओं में नवें स्थान पर मातंगी साधना मानी जाती हैं ! इस साधना को करने से के बाद साधक के जीवन में बहुत ही समस्याओं का स्वयं ही निवारण हो जाता हैं ! हम आपको यंहा महाविद्या मातंगी साधना विधि, mahavidya matangi sadhana vidhi, mahavidya matangi sadhana, दस महाविद्या मातंगी मंत्र, dasa mahavidya matangi mantra, मातंगी पूजा विधि, matangi puja vidhi, matangi siddhi mantra, मातंगी उपासना विधि, matangi upasana vidhi, मातंगी साधना विधि, matangi sadhana vidhi, मातंगी साधना कैसे करें, matangi sadhana kaise kare आदि के बारे में ज्यादा से जयादा जानकारी देने की कोशिश की हैं ! Online Specialist Astrologer Acharya Pandit Lalit Sharma द्वारा बताये जा रहे महाविद्या मातंगी साधना विधि ( Mahavidya Matangi Sadhana Vidhi & Matangi Sadhana Kaise Kare ) को जानकर आप भी महाविद्या मातंगी साधना पूरी कर सकते हैं !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! जय श्री मेरे पूज्यनीय माता – पिता जी !! यदि आप अपनी कुंडली दिखा कर परामर्श लेना चाहते हो तो या किसी समस्या से निजात पाना चाहते हो तो कॉल करके या नीचे दिए लाइव चैट ( Live Chat ) से चैट करे साथ ही साथ यदि आप जन्मकुंडली, वर्षफल, या लाल किताब कुंडली भी बनवाने हेतु भी सम्पर्क करें Mobile & Whats app Number : 7821878500 mahavidya matangi sadhana vidhi by acharya pandit lalit sharma

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महाविद्या मातंगी साधना विधि : mahavidya matangi sadhana vidhi in hindi

महाविद्या मातंगी साधना को करने के लिए साधक की समस्त सामग्री में विशेष रूप से सिद्धि युक्त होनी चाहिये ! यदि ऐसा नही हुई तो आप यह साधन नही कर सकोंगे ! महाविद्या मातंगी साधना के साधक को सिद्ध प्राण प्रतिष्ठित “मातंगी यंत्र”,“मातंगी गुटिका”,”नीली हकीक माला” ये तीन चीजें होनी चाहिये ! महाविद्या मातंगी साधना आप नवरात्रि या किसी भी शुक्ल पक्ष के शुकवार के दिन से शुरू कर सकते हैं ! मातंगी साधना का समय रात्रि में सवा दस के समय कर सकते हैं ! महाविद्या मातंगी साधना वाले साधक को स्नान करके शुद्ध नीले वस्त्र धारण करके अपने घर में किसी एकान्त स्थान या पूजा कक्ष में पश्चिम दिशा की तरफ़ मुख करके नीले ऊनी आसन पर बैठ जाए ! उसके बाद अपने सामने चौकी रखकर उस पर नीले रंग का कपड़ा बिछाकर उस पर प्लेट रखकर रोली से अष्टदल बनाये उसके बाद उस अष्टदल पर सिद्ध प्राण प्रतिष्ठा युक्त “मातंगी यंत्र” को स्थापित करें ! “मातंगी यंत्र” के उपाय “मातंगी गुटिका” रखे ! फिर उसके बाद मातंगी यंत्र के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाकर यंत्र का पूजन करें और मन्त्र विधान अनुसार संकल्प आदि कर सीधे हाथ में जल लेकर विनियोग पढ़े : 

ॐ अस्य श्रीमातंगी महामन्त्रस्य दक्षिणामूर्ति ऋषि: विराट् छन्द: श्रीमातंगी देवता ह्रीं बीजं हूँ शक्ति: क्लीं कीलकम श्रीमातंगी प्रीत्यर्थे जपे विनियोग:।

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ऋष्यादि न्यास : बाएँ हाथ में जल लेकर दाहिने हाथ की समूहबद्ध, पांचों उंगलियों से नीचे दिए गये निम्न मंत्रो का उच्चारण करते हुए अपने भिन्न भिन्न अंगों को स्पर्श करते हुए ऐसी भावना मन में रखें कि वे सभी अंग तेजस्वी और पवित्र होते जा रहे हैं ! ऐसा करने से आपके अंग शक्तिशाली बनेंगे और आपमें चेतना प्राप्त होती है ! मंत्र :

दक्षिणामूर्तिऋषये नम: शिरसि ( सर को स्पर्श करें )

विराट्छन्दसे नम: मुखे ( मुंह को स्पर्श करें )

श्रीमातंगीदेवतायै नम: ह्रदये ( ह्रदय को स्पर्श करें )

ह्रीं बीजाय नम: गुहे ( गुप्तांग को स्पर्श करें )

हूं शक्तये नम: पादयो: ( दोनों पैरों को स्पर्श करें )

क्लीं कीलकाय नम: नाभौ ( नाभि को स्पर्श करें )

विनियोगाय नम: सर्वांगे ( अपने पूरे शरीर को स्पर्श करें )

कर न्यास :  अपने दोनों हाथों के अंगूठे से अपने हाथ की विभिन्न उंगलियों को स्पर्श करें, ऐसा करने से उंगलियों में चेतना प्राप्त होती है ।

ह्राँ अंगुष्ठाभ्यां नम: ।

ह्रीं तर्जनीभ्यां नम: ।

ह्रूं मध्यमाभ्यां नम: ।

ह्रैं अनामिकाभ्यां नम: ।

ह्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नम: ।

ह्र: करतलकरप्रष्ठाभ्यां नम: ।

ह्र्दयादि न्यास :  पुन: बाएँ हाथ में जल लेकर दाहिने हाथ की समूहबद्ध, पांचों उंगलियों से नीचे दिए गये निम्न मंत्रों के साथ शरीर के विभिन्न अंगों को स्पर्श करते हुए ऐसी भावना मन में रखें कि वे सभी अंग तेजस्वी और पवित्र होते जा रहे हैं ! ऐसा करने से आपके अंग शक्तिशाली बनेंगे और आपमें चेतना प्राप्त होती है ! मंत्र :

ह्राँ ह्रदयाय नम: ( ह्रदय को स्पर्श करें )

ह्रीं शिरसे स्वाहा ( सिर को स्पर्श करें )

ह्रूं शिखायै वषट् ( शिखा को स्पर्श करें )

ह्रैं कवचाय हुम् ( दोनों कंधों को स्पर्श करें )

ह्रौं नेत्रत्र्याय वौषट् ( नेत्रों को स्पर्श करें )

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मांगलिक दोष निवारण || Mangal Dosha Nivaran

दी गई YouTube Video पर क्लिक करके मांगलिक दोष के उपाय || Manglik Dosh Ke Upay बहुत आसन तरीके से सुन ओर देख सकोगें !

ह्र: अस्त्राय फट् ( हाथ सर के ऊपर से घुमाकर चारों दिशाओं में चुटकी बजाएं )

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मातंगी ध्यान : इसके बाद दोनों हाथ जोड़कर माँ भगवती मातंगी का ध्यान करके, मातंगी माँ का पूजन करे धुप, दीप, चावल, नीले पुष्प से तदनन्तर मातंगी महाविद्या मन्त्र का जाप करें !

माणिक्यवीणामुपलालयन्तीं, मदालसां मंजुलवाग्विलासाम् ।

महेंद्र नीलधूति कोमलांगी, मातंग कन्यां मनसा स्मरामि ।।

ऊपर दिया गया पूजन सम्पन्न करके सिद्ध प्राण प्रतिष्ठित “नीली हकीक माला” की माला से नीचे दिए गये मंत्र की 23 माला 11 दिनों तक जप करें ! और मंत्र उच्चारण करने के बाद मातंगी कवच का पाठ करें !

मातंगी साधना सिद्धि मन्त्र : matangi sadhana siddhi mantra

।। ॐ ह्रीं क्लीं हुं मातंग्यैं फट् स्वाहा ।।

मंत्र उच्चारण करने के मातंगी कवच पढ़ें : मातंगी कवच पढ़ने के लिए क्लिक करें : Click Here

दी गई यह महाविद्या मातंगी साधना mahavidya matangi sadhana ग्यारह दिनों की साधना है ! साधना करते समय साधक पूर्ण आस्था के साथ नियमों का पालन जरुर करें !  और नित्य जाप करने से पहले ऊपर दी गई संक्षिप्त पूजन विधि जरुर करें ! साधक साधना करने की जानकारी गुप्त रखें ! ग्यारह दिनों के बाद मन्त्रों का जाप करने के बाद दिए गये मन्त्र जिसका आपने जाप किया हैं उस मन्त्र का दशांश ( 10% भाग ) हवन अवश्य करें ! हवन में पलाश के पुष्प, शुद्ध घी व् हवन सामग्री को मिलाकर आहुति दें ! हवन के बाद मातंगी यंत्र को अपने घर के मंदिर या तिजोरी में लाल वस्त्र से बांधकर एक साल के लिए रख दें और बाकि बची हुई पूजा सामग्री को नदी या किसी पीपल के नीचे विसर्जन कर आयें ! ऐसा करने से साधक की साधना पूर्ण हो जाती हैं ! और साधक के ऊपर माँ मातंगी देवी की कृपा सदैव बनी रही हैं ! मातंगी साधना mahavidya matangi sadhana करने से साधक के जीवन में ज्ञान, धन सम्मान, प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है ! साधक के जीवन में दरिद्रता पूर्णत: रूप से समाप्त हो जाती हैं ! 

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