गायत्री अष्टक ( Gayatri Ashtakam ) Shri Gayatri Ashtakam

       

गायत्री अष्टक [ Gayatri Ashtakam & Shri Gayatri Ashtakam ] 

गायत्री अष्टक के लाभ : gayatri ashtakam ke labh : गायत्री अष्टक देवी माँ गायत्री जी को समर्पित हैं ! गायत्री अष्टक पढ़ने के बहुत फ़ायदे हैं ! गायत्री अष्टक को नियमित पाठ करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाए पूर्ण होती है इसके साथ साथ गायत्री अष्टक पढ़ने से साधना में सफ़लता, अपने शरीर की रक्षा कवच का कार्य करता हैं ! गायत्री अष्टक, gayatri ashtakam, shri gayatri ashtakam, गायत्री अष्टकम, गायत्री अष्टक के फ़ायदे, gayatri ashtakam ke fayde, गायत्री अष्टक के लाभ, gayatri ashtakam ke labh, gayatri ashtakam benefits, shri gayatri ashtakam in sanskrit, gayatri ashtakam, gayatri ashtakam mp3 download, gayatri ashtakam lyrics, gayatri ashtakam pdf आदि के बारे में बताने जा रहे हैं !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! यदि आप अपनी कुंडली दिखा कर परामर्श लेना चाहते हो तो या किसी समस्या से निजात पाना चाहते हो तो कॉल करके या नीचे दिए लाइव चैट ( Live Chat ) से चैट करे साथ ही साथ यदि आप जन्मकुंडली, वर्षफल, या लाल किताब कुंडली भी बनवाने हेतु भी सम्पर्क करें : 7821878500 gayatri ashtakam by acharya pandit lalit sharma 

गायत्री अष्टक !! gayatri ashtakam in hindi

सुकल्याणीं वाणीं सुरमुनिवरैः पूजितपदाम

शिवाम आद्यां वंद्याम त्रिभुवन मयीं वेदजननीं

परां शक्तिं स्रष्टुं विविध विध रूपां गुण मयीं

भजे अम्बां गायत्रीं परम सुभगा नंदजनीम

विशुद्धां सत्त्वस्थाम अखिल दुरवस्थादिहरणीम्

निराकारां सारां सुविमल तपो मुर्तिं अतुलां

जगत् ज्येष्ठां श्रेष्ठां सुर असुर पूज्यां श्रुतिनुतां

भजे अम्बां गायत्रीं परम सुभगा नंदजनीम

तपो निष्ठां अभिष्टां स्वजनमन संताप शमनीम

दयामूर्तिं स्फूर्तिं यतितति प्रसादैक सुलभां

वरेण्यां पुण्यां तां निखिल भवबन्धाप हरणीं

भजे अम्बां गायत्रीं परम सुभगा नंदजनीम

सदा आराध्यां साध्यां सुमति मति विस्तारकरणीं

विशोकां आलोकां ह्रदयगत मोहान्धहरणीं

परां दिव्यां भव्यां अगम भव सिन्ध्वेक तरणीं

भजे अम्बां गायत्रीं परम सुभगा नंदजनीम

अजां द्वैतां त्रेतां विविध गुणरूपां सुविमलां

तमो हन्त्रीं तन्त्रीं श्रुति मधुरनादां रसमयीं

महामान्यां धन्यां सततकरूणाशील विभवां

भजे अम्बां गायत्रीं परम सुभगा नंदजनीम

जगत् धात्रीं पात्रीं सकल भव संहारकरणीं

सुवीरां धीरां तां सुविमलतपो राशि सरणीं

अनैकां ऐकां वै त्रयजगत् अधिष्ठान् पदवीं

भजे अम्बां गायत्रीं परम सुभगा नंदजनीम

प्रबुद्धां बुद्धां तां स्वजनयति जाड्यापहरणीं

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हिरण्यां गुण्यां तां सुकविजन गीतां सुनिपुणीं

सुविद्यां निरवद्याममल गुणगाथां भगवतीं

भजे अम्बां गायत्रीं परम सुभगा नंदजनीम

अनन्तां शान्तां यां भजति वुध वृन्दः श्रुतिमयीम

सुगेयां ध्येयां यां स्मरति ह्रदि नित्यं सुरपतिः

सदा भक्त्या शक्त्या प्रणतमतिभिः प्रितिवशगां

भजे अम्बां गायत्रीं परम सुभगा नंदजनीम

शुद्ध चितः पठेद्यस्तु गायत्र्या अष्टकं शुभम्

अहो भाग्यो भवेल्लोके तस्मिन् माता प्रसीदति

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