दुर्गा सप्तशती मन्त्र ( Durga Saptashati Mantras ) Shri Durga Saptashati Mantra

       

दुर्गा सप्तशती मन्त्र [ Durga Saptashati Mantras & Shri Durga Saptashati Mantra ]

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दुर्गा सप्तशती मन्त्र मुख्य श्लोक !! durga saptashati mantras mukhya slokas in hindi

देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूर्त्या ।

तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां भक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः ॥१॥

यस्याः प्रभावमतुलं भगवाननन्तो ब्रह्मा हरश्च न हि वक्तुमलं बलं च।

सा चण्डिका किल जगत्परिपालनाय नाशाय चाशु भयस्य मतिं करोति ॥२॥

विश्वेश्वरि त्वं परिपासि विश्वं विश्वात्मिका धारयसीति विश्वं।

विश्वेशवन्द्या भवती भवन्ति विश्वाश्रया ये त्वयि भक्तिनम्राः ॥३॥

देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोऽखिलस्य।

प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य॥४॥

देवि प्रसीद परिपालयनोऽरिभीतेः नित्यं यथाऽसुरवधादधुनैव सद्यः।

पापानि सर्वजगतां प्रशमं नयाशु उत्पातपाकजनितांश्च महोपसर्गान् ॥५॥

ते सम्मता जनपदेषु धनानि तेषां तेषां यशांसि न च सीदति धर्मवर्गः।

धन्यास्त एव निभृतात्मजभृत्यदारा येषां सदाभ्युदयदा भवती प्रसन्ना॥६॥

विद्यास्समस्तास्तव देवि भेदाः स्त्रियस्समस्ताः सकला जगत्सु।

त्वयैकयापूरितमम्बयैतत् का ते स्तुतिः स्तव्यपरा परोक्तिः॥७॥

त्वं वैष्णवी शक्तिरनन्तवीर्या विश्वस्य बीजं परमासि माया।

सम्मोहितं देवि समस्तमेतत् त्वं वै प्रसन्ना भुवि मुक्तिहेतुः ॥८॥

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