छोटी दिवाली के दिन करें ये उपाय !! Choti Diwali Ke Din Kare Ye Upay

       

छोटी दिवाली के दिन करें ये उपाय [ Choti Diwali Ke Din Kare Ye Upay ] : 

हम आपको छोटी दिवाली के उपाय ( Narak Chaturdashi Ke Upay ) बताने जा रहे हैं ! जिन्हें आप नरक चतुर्दशी यानि छोटी दिवाली के दिन करने श्री हनुमान जी से अपने दुखों से मुक्ति पा सकते हैं !  क्यों की यह तो आप सब पहले से जानते हैं की छोटी दिवाली को श्री हनुमान जयंती के रूप में भी मनाया जाता हैं ! इसलिए छोटी दिवाली वाले दिन भगवान श्री हनुमान जी की पूजा करने से विशेष लाभ प्राप्त होता हैं ! Online Specialist Astrologer Acharya Pandit Lalit Sharma द्वारा बताये जा रहे छोटी दिवाली के दिन करें ये उपाय ( Choti Diwali Ke Din Kare Ye Upay ) को करके आप भी अपने जीवन में फायदा व् लाभ उठा सकते है !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! जय श्री मेरे पूज्यनीय माता – पिता जी !! यदि आप अपनी कुंडली दिखा कर परामर्श लेना चाहते हो तो या किसी समस्या से निजात पाना चाहते हो तो कॉल करके या नीचे दिए लाइव चैट ( Live Chat ) से चैट करे साथ ही साथ यदि आप जन्मकुंडली, वर्षफल, या लाल किताब कुंडली भी बनवाने हेतु भी सम्पर्क करें Mobile & Whats app Number : 7821878500

कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी हनुमत जयंती सारे पापों से मुक्त करने ओर हर तरह से सुख-आनंद एवं शांति प्रदान करने वाले हनुमान जी की उपासना लाभकारी एवं सुगम मानी गयी है। पुराणों के अनुसार कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी मंगलवार, स्वाति नक्षत्र मेष लग्न में स्वयं भगवान शिवजी ने अंजना के गर्भ से रुद्रावतार लिया | विभिन्न मतों के अनुसार देश में हनुमान जयंती वर्ष में दो बार मनाई जाती है। पहली चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को व दूसरी कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को। बाल्मीकि रामायण के अनुसार हनुमान जी का जन्म कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को हुआ है। आज के दिन हनुमान जी का षोडशोपचार पूजन करे | पूजन के उपचारो मे गंधपूर्ण तेल मे सिंधूर मिलाकर उससे मूर्ति चर्चित करे| पुन्नाम (हजारा ,गुलहजारा) आदि के फूल चढ़ाए और नैवैद्य मे चूरमा या आटे के लड्डू व फल इत्यादि अर्पण करके ‘वाल्मिकीय रामायण’ अथवा श्री राम चरितमानस  के सुंदरकाण्ड का पाठ करे और रात के समय दीप जलाकर छोटी दीपावली का आनद ले | 

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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को श्री हनुमान जयन्ती मनाने का यह कारण है लंका विजय के बाद जब हनुमानजी को अयोध्या से विदा करते समय सीता जी ने हनुमानजी को बहुमूल्य आभूषण दिये किन्तु श्री हनुमान जी संतुष्ट नहीं हुए, तब माता सीता जी ने उन्हें अपने ललाट से सिंदूर प्रदान किया और कहा कि “इससे बढ़कर मेरे पास अधिक महत्व कि वस्तु कोई नहीं है, अतएव इसको धारण करके अजर-अमर रहो” यही कारण है इस दिन हनुमान जी को सिंदूर अवश्य लगाया जाता है और हनुमान जयन्ती मनाई जाती है | हनुमत जयंती के पावन अवसर पर हनुमान चालीसा, हनुमत अष्टक व बजरंग बाण का पाठ करने से शनि, राहु व केतु जन्य दोषों से मुक्ति पाई जा सकती है। इस दिन सुंदर कांड का पाठ करते हुए अष्टादश मंत्र का जप भी करना चाहिए। अष्टादश मंत्र : “ॐ भगवते आन्जनेयाय महाबलाय स्वाहा”

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